कीर्तिमान।

Nice work done.. 🙂

loudmoments

वैध-अवैध में फर्क मानते हैं हम
जितना धर्म में ईश्वर का होना-ना होना
सजातीय-विजातीय के चक्रव्यूह में फंसे रहना
दिन या रात को भयानक मान लेना।

इसकी परिणति कहाँ है?
जैसे वृत्त का निर्धारण, बिंदु है?
समय का निर्धारण, अनन्त है?
शांति का निर्धारण, प्रचण्ड है?

आज पड़ोस का कुत्ता कहीं से चित्कारती आत्मा उठा लाया
अफ़ग़ानिस्तान-इराक-पाकिस्तान-फिलिस्तीन में ड्रोन धमाके सुन आया
नवजीवन ने कुत्ते के मुँह से पहले, बारूद सूंघ लिया था
और फासीवाद लोकतंत्र की जड़ों में पहुँच गया था।

ये सब निहायत बकवास है
चूंकि ना मैं इराकी हूँ, ना फिलिस्तीनी, ना अफगानी, ना पाकिस्तानी
आग काफी दूर है, इतनी की बार्बेक्यू तो तैयार हो ही जाएगा
मटन और रेड वाइन है, आओ इंटेलेक्चुअल डिस्कशन करें।

अंत में वैध-अवैध में फंस कर अमानवीयता के नये कीर्तिमान, नये सौपान खड़े करें।

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